बारिशो के
मौसम में
मन जब
चाहे किसी के
साथ दूर तक
टहल आने को
मेरा ख्याल तो
नहीं आता न
तुम को
किसी अंजान
शहर में
घूमते हुए
नजरें जब
किसी अजनबी
चेहरे में
तलाशने लगे
किसी खास
शख्स को
मेरा ख्याल तो
नहीं आता न
तुम को
या फिर
निपट अकेलेपन में
चाह हो
किसी कंधे की
किसी स्पर्श की
दिल खोल के रखने को
जी चाहे जब
मैं जानती हूँ
फिर भी
जाने क्यूँ
होता है ये यकीं
तुम्हारे ख्यालो में
मैं भी कहीं तो
महकती होंगी न..........
