बारिशो के
मौसम में
मन जब
चाहे किसी के
साथ दूर तक
टहल आने को
मेरा ख्याल तो
नहीं आता न
तुम को
किसी अंजान
शहर में
घूमते हुए
नजरें जब
किसी अजनबी
चेहरे में
तलाशने लगे
किसी खास
शख्स को
मेरा ख्याल तो
नहीं आता न
तुम को
या फिर
निपट अकेलेपन में
चाह हो
किसी कंधे की
किसी स्पर्श की
दिल खोल के रखने को
जी चाहे जब
मैं जानती हूँ
फिर भी
जाने क्यूँ
होता है ये यकीं
तुम्हारे ख्यालो में
मैं भी कहीं तो
महकती होंगी न..........

bahut badiya divya ... blog ki tarah apki rachna b sunder hai ...
ReplyDeleteaise hi likhti rahiye mehkati rahiye
बहुत ही सुन्दर और भाव पूर्ण रचना
ReplyDeleteCan you remove comments word verification...
वाह आपकी रचना ने तो बेमौसम बरसात का मजा दे दिया बहुत ही सुन्दर सटीक भावपूर्ण प्रस्तुति हार्दिक बधाई स्वीकारें दिव्या जी.
ReplyDeleteबहुत सुन्दर रचना
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर भाव
ReplyDeleteबहुत बढ़िया लिखा है आपने,
ReplyDeleteआप हमारे फोरम पर भी अपने लेख पोस्ट करने के लिए आमंत्रित है, आपका इंतज़ार रहेगा !
आशा करता हूँ कि जल्दी ही आपसे फोरम पर मुलाकात होगी ! :)
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